वेब पब्लिशिंग क्या है? – Web Publishing in Hindi

वेब पर content प्रकाशित करने के लिए, आपको तीन चीजों की आवश्यकता है:
1) वेब विकास सॉफ्टवेयर, (web development software)
2) एक इंटरनेट कनेक्शन, (internet connection)
3) एक वेब सर्वर, (web server)
वेब पब्लिशिंग के चरण-
कोई वेबसाइट तैयार करके उसे इंटरनेट पर सबके उपयोग के लिये डालने की प्रक्रिया एक लम्बी प्रक्रिया है, जो किसी पुस्तक के प्रकाशन की तरह कई चरणो मे पूरी की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया को हम निम्नलिखित पाॅच चरणो मे बाॅट सकते है-
1. डोमेन नाम का रजिस्ट्रेशन करना।
2. वेब होस्टिंग।
3. वेबसाइट डिजाइन और विकास।
4. प्रचार या प्रमोशन।
5. रखरखाव।
किसी सफल वेबसाइट के लिये ये सभी चरण महत्वपूर्ण है।
1. डोमेन नेम रजिस्ट्रेशन
किसी वेबसाइट का डोमेन नाम उसका ऐसा नाम या पता है जिससे इंटरनेट के उपयोगकर्ता द्वारा उसको पहचाना और देखा जाता है। वेब प्रकाशन का पहला चरण उस वेबसाइट के लिये कोई डोमेन नाम तय करना और किसी वेब सर्वर पर उस डोमेन नाम को पंजीकृत करना होता है।
डोमेन नेम चुनना
अपनी वेबसाइट के लिये डोमेन नाम का चयन आपको स्वयं करना होता है। यह नाम ऐसा होना चाहिये जो पहले से किसी अन्य वेबसाइट का ना हो और आपकी साइट के उददेश्य तथा सामाग्री का संकेत देता हो। सामान्यतः कोई कंपनी अपने नाम जैसा ही डोमेन नाम पंजीकृत कराता है यदि वह उपलब्ध हो। यदि वह उपलब्ध नही है तो उससे मिलता जुलता कोई नाम लिया जा सकता है, जो उपलब्ध हो।
वेबसाइट के लिये डोमेन नाम चुनते समय निम्नलिखित बातो को ध्यान मे रखना चाहिए-
1. डोमेन नेम ऐसा होना चाहिए जो आपका या आपकी कंपनी का या आपके ब्रांड का नाम हो। ऐसा करने से आपके ग्राहको को आपकी वेबसाइट तक पहुचना सरल होगा, क्योकि किसी भी व्यक्ति के लिये भिन्न नामो को याद रखना संभव नही होता है।
2. डोमेन नाम जितना छोटा हो, उतना ही अच्छा रहता है। छोटे नामो को याद रखना या टाइप करना भी सरल होता है। डोमेन नाम 67 अक्षरो जितने लंबे भी हो सकते है।
3. डोमेन नेम मे हाइफन (-) या डैश (-) का उपयोग सामान्यतया: नही होना चाहिए।
4. डोमेन नेम मे कैपीटल अक्षरो के प्रयोग से बचना चाहिए। सामान्यतः सभी डोमेन नाम छोटे अक्षरो मे रखे जाते है।
5. डोमेन नेम मे बहुवचन का प्रयोग नही होना चाहिए, क्योकि कई बार उपयोगकर्ता बहुवचन अर्थात अक्षर टाईप करना भूल जाते है। इससे गलत वेबसाइट खुल जाती है।
6. डोमेन नेम मे आपकी साइट के उददेश्य का भी पता चलता है। अतः यदि आपकी साइट परोपकारी या स्वयंसेवी संस्था है, तो आपको कभी भी .COM नाम नही लेना चाहिए। इसके बजाह ण्वतह वाला डोमेन नाम लेना चाहिए।
यदि आप इन बातो का ध्यान मे रखते हुए अपना डोमेन नाम तय करेगे तो आपकी वेबसाइट के सफल होने की अधिक संभावना होगी।
डोमेन नाम पंजीकृत कराना
डोमेन नेम रजिस्ट्रि जिसे नेटवर्क इनफाॅमेशन सेटंर जाता है, डोमेन नाम सिस्टम का एक भाग है जो डोमेन नामो को IP Address मे बदलता है। यह एक संगठन है जो डोमेन नाम के पंजीकरण का प्रबंध करता है।डोमेन नाम आवंटित करने की नीति बनाता है और उच्च स्तरीय डोमेन को आॅपरेट करता है। यह डोमेन नाम के रजिस्ट्रारो से अलग होता है। डोमेन नामो को रजिस्टर करने का कार्य Internet Assigned Numbers Authorty या (IANA) नामक समिति द्वारा किया जाता है। यह समिति उच्च स्तरीय डोमेन नामो को स्वयं पंजीकृत करती है और शेष कार्य को विभिन्न संगठनो पर छोड देती है।
विभिन्न देशो के डोमेन नाम रजिस्टर करने वाले अनेक संगठन और वेबसाइट है। आप उनमे से किसी भी निर्धारित शुल्क देकर अपना डोमेन नाम पंजीकृत करा सकते है। उदाहरण के लिये भारत मे Yaho.com, GoDaddy.com, Candidinfo.com, Sify.com, Dotster.com, Register.com आदि अनेक वेबसाइटे यह कार्य करती है। उनका शुल्क अलग अलग होता है। डोमेन नाम पंजीकरण सामान्यतः एक साल के लिये किया जाता है। यह अवधि समाप्त होने से पहले ही आप फिर शुल्क देकर पंजीकरण बढा सकते है। वैसे आप एक साथ कई साल का शुल्क जमा करके भी अपना डोमेन नाम कई वर्ष के लिये पंजीकृत करा सकते है। कई वेबसाइट आपको निशुल्क डोमेन नाम देने का भी प्रस्ताव रखती है, परन्तु ऐसा करने से पहले आपको अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए।
2. वेब होस्टिंग
यह वेब पब्लिशिंग का सबसे महत्वपूर्ण भाग कहा जाता है। यह अपने आॅफिस या दुकान के लिये केाई जगह किराये पर लेने के समान है। जब आप अपनी वेबसाइट के डोमेन नाम का पंजीकरण करा लेते है और उसको डिजाइन कर लेते है, तो उसको किसी वेब सर्वर पर स्टोर करना ही वेब होस्टिंग कहा जाता है। यह कार्य किसी अच्छे वेब सर्वर पर ही किया जाता है, क्योंकि वे आपकी वेबसाइट को 24 घंटे सक्रिय रखते है और उसका उपयोग इंटरनेट पर सभी को उपलब्ध कराते है।
3. वेबसाइट डिजाइन और विकास
कोई वेबसाइट किसी विशेष विषय पर सूचनाओ का एक संग्रह होती है। किसी वेबसाइट को डिजाइन करने से हमारा तात्पर्य उसके वेब पेजो का निर्माण और उन्हे किसी विशेष रूप मे व्यवस्थित करना होता है। विभिन्न वेब पेजो से मिलकर ही कोई वेबसाइट बनती है। किसी वेब पेजे मे उन मे उन सूचनाओ कोई भाग होता है जिनके लिये वेबसाइट को बनाया गया है। इस प्रकार आप किसी वेबसाइट को एक पुस्तक के रूप मे देख सकते है, जिसके प्रत्येक पृष्ठ को एक वेब पेेज माना जा सकता है।
4. प्रचार या प्रमोशन
किसी वेबसाइट का प्रचार निम्नलिखित विधियो से किया जाता है-
1. समाचार पत्रो या पत्रिकाओ मे विज्ञापन द्वारा।
2. रेडियो, टीवी. आदि पर विज्ञापन।
3. अन्य प्रसिध्द वेबसाइटो पर विज्ञापन देना।
4. अपनी साइट को सर्च इंजनो जैसे गूगल और याहू के साथ जोडना।
5. रखरखाव
किसी वेबसाइट की सफलता के लिये यह आवश्यक है कि उसमे नवीनता और रोचकता रहे ताकि उसके आगंतुक उसमे आते रहे। इसके लिये आपको अपनी वेबसाइट निरन्तर सुधारने और पुरानी जानकारी हटाकर नई जानकारियाॅ डालते रहने की आवश्यकता होती है। इसलिये अपनी वेबसाइट पर स्वयं भ्रमण करते रहना चाहिए तथा परिवर्तनो की आवश्यकता का पता लगाते रहना चाहिए। विशेष तौर पर आपके उत्पादो, सेवाओ और उनके मूल्यो की जानकारी नवीनतम होनी चाहिए।
Advantages of Web Publishing in Hindi – वेब पब्लिशिंग के फायदे
इसके फायदे नीचे दिए गये है:-
- वेब पब्लिशिंग की मदद से लोग online वेबसाइट को एक्सेस कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के पोस्ट को पढ़ सकते हैं और comment भी कर सकते हैं.
- इससे लोगों का समय बचता है क्योंकि वो google में search करके किसी भी वेबसाइट को access कर सकते हैं.
- वेब पब्लिशिंग में बहुत कम खर्चा आता है, इसमें सिर्फ होस्टिंग और इन्टरनेट का खर्चा आता है.
- वेब पब्लिशिंग का एक फायदा यह भी है कि हम content को publish करने के बाद भी उसे edit कर सकते हैं.
- इंटरनेट में upload किये गये content को हम दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस कर सकते हैं.
- वेब पब्लिशिंग के द्वारा publisher पैसे भी कमा सकते हैं. पब्लिशर वेबसाइट में ads लगाकर पैसे कमा सकते हैं.
- इसमें content को स्टोर करने के लिए कम मैमोरी की जरूरत होती है.
Difference between Web Publishing & Web Hosting in Hindi – वेब पब्लिशिंग और वेब होस्टिंग में अंतर
इनके बीच अंतर को नीचे दी गयी table के आधार पर आसानी से समझ सकते हैं:-
| Web Publishing | Web Hosting |
| यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें internet में content को upload या publish किया जाता है. | यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सर्वर का इस्तेमाल वेबसाइट को host करने के लिए किया जाता है. |
| इसमें फाइलों को अपलोड करना, वेब पेज को अपडेट करना और ब्लॉग पोस्ट को इंटरनेट पर publish या upload करना जैसे कार्य शामिल होते है। | इसमें सर्वर में वेबसाइट को स्टोर करने, डेटा को मैनेज करने और वेबसाइट को सुरक्षित करने जैसे कार्य शामिल होते है. |
| यह वेबसाइट को डिज़ाइन करने के लिए यूजर को पहले से ही तैयार theme प्रदान करता है। | यह वेबसाइट को डिज़ाइन करने के लिए यूजर को theme प्रदान नहीं करता है। |
| यह beginner और advance दोनों level का customization प्रदान करता है. | यह सिर्फ advance level का customization प्रदान करता है. |
| इसका उद्देश्य लोगों को content प्रदान करना होता है. | इसका उद्देश्य वेबसाइट को मैमोरी प्रदान करना होता है. |
| वेब पब्लिशिंग के मुख्य कॉम्पोनेन्ट domain name planning, registration, web hosting, web design और development होते है। | वेब होस्टिंग के मुख्य कॉम्पोनेन्ट Web Browser, FTP Client, Database Server और FTP Server होते है। |
Exam में पूछे जाने वाले प्रश्न
यह एक प्रक्रिया है जिसमें text, image, video, audio और animation को वेबसाइट में अपलोड किया जाता है.
इसके लिए तीन चीजों की आवश्यकता होती है:- वेब पब्लिशिंग सॉफ्टवेयर, इन्टरनेट और वेब सर्वर.
निवेदन:- अगर आपके लिए What is Web Publishing in Hindi (वेब पब्लिशिंग क्या है?) का यह आर्टिकल उपयोगी रहा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ अवश्य share कीजिये. और आपके जो भी questions हो उन्हें नीचे comment करके बताइए. धन्यवाद.
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